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सर्पगन्धा घन वटी हाई ब्लडप्रेशर मे तुरन्त राहत के लिये

 सर्पगन्धा घन वटी

आजकल अनुचित दिनचर्या और ग़लत आहार आहार-विहार के कारण वातप्रकोप और पित्त प्रकोप, अम्लपित्त कब्ज़, आदि की स्थिति से ग्रस्त होना आम बात है। इन व्याधियों के कारण नींद न आने और ब्लडप्रेशर बढ़ने की शिकायत होती है। इन व्याधियों को दूर करने वाले एक योग सर्पगन्धा घनवटी का परिचय प्रस्तुत है।

घटक द्रव्य - सर्पगन्धा १०० ग्राम, खुरासानी अजवायन के पत्ते या

बीज २० ग्राम और जटामांसी १० ग्राम । भांग १०० ग्राम । थोड़ा पीपलामूल।

निर्माण विधि - तीनों को मोटा मोटा कूट कर एक लिटर पानी में डाल कर उबालें। जब पानी सवा सौ मि.लि. बचे तब उतार लें। ठण्डा करके कपड़े से दो बार छानें। इस पानी को एक तरफ रख दें और कपड़े में छने फोक में उतना ही पानी डाल कर पकाएं और कपड़े से छान कर दोनों पानी मिला कर मन्दी आंच पर पकाएं और कलछुल या लकड़ी से हिलाते - चलाते रहें। जब खूब गाढ़ा हो जाए तब उतार कर ठण्डा कर लें और सुखाएं। जब गोली बनने योग्य हो जाए तब १०० ग्राम पिसी भांग और घन से चतुर्थाश भाग पीपलामूल का चूर्ण मिला कर आधा आधा ग्राम की गोलियां बना लें



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मात्रा और सेवन विधि - रात को सोते समय १ गोली पानी या दूध के साथ लेना चाहिए।

लाभ- इस वटी के सेवन से मस्तिष्क को आराम मिलता है और नींद गहरी आती है, हाईब्लड प्रेशर सामान्य होता है और अनिद्रारोग नष्ट होता है। गर्म प्रकृति वालों कोयह गोली दध के साथ लेना चाहिए। लाभ न होने तक इस औषधि का सेवन करते रहना चाहिए। यदि ब्लड प्रेशर ज्यादाबढ़ा हुआ हो तो एक या दो गोली सुबह और शाम को ले सकते हैं 

विशेष - इसके साथ कामदुधा रस की 2-2 गोली लेने से जल्दी लाभ होता हे ओर सर दर्द फ़ोरन कम हो जाता हे


यह योग बना बनाया इसी नाम से बाज़ार में मिलता है। इसे आप ऑनलाइन अमेज़ोन जेसी विस्वासनीय कंपनी से बुलवा सकते हे जिसका लिंक यहाँ दिया हे आप इसे आसानी से घर बेठे बुला सकते हे अगर ये आप को नही मिले तो हम से संपर्क करे 



Sarpagandha Ghan Vati


Nowadays, it is common to suffer from the condition of gout and bile effusion, acidity, constipation, etc. due to improper routine and wrong diet and diet. Due to these diseases, there is a complaint of sleeplessness and increased blood pressure. The introduction of a yoga Sarpagandha Ghanvati, which removes these diseases, is presented.


Ingredients: Sarpagandha 100 grams, Khurasani oregano leaves or


Seed 20 grams and Jatamansi 10 grams. Hemp 100 grams. A little peepalm.


Method of preparation - Boil all three by putting them in a liter of water after grinding them coarsely. When water is 125 ml. Take off the rest. Cool it and filter it twice with a cloth. Keep this water aside and cook by adding the same amount of water to the filtered cloth and after filtering through the cloth, mix both the waters and cook on low flame and keep stirring with a ladle or wood. When it becomes very thick, take it off, cool it and dry it. When the tablet becomes capable, then make tablets of half a gram by mixing 100 grams of ground cannabis and one-fourth part of the cube with the powder of Peepalmool.


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Dosage and intake method - 1 tablet should be taken with water or milk at bedtime.


Benefits- By consuming this vati, the brain gets rest and sleep comes deep, high blood pressure is normalized and insomnia disease is destroyed. Those with hot nature should take this tablet with milk. This medicine should be continued till there is no benefit. If the blood pressure is high, then one or two tablets can be taken in the morning and evening.


Special - Taking 2-2 tablets of Kamdudha juice along with it gives quick benefits and reduces headache immediately.


This yoga is made ready-made and is available in the market with the same name. You can call it online from Amazon JC Reliable Company, whose link is given here, you can easily call it from home, if you do not get it, then contact us.



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मन्मथ रस

 मन्मथ रस


घटक द्रव्य-शुद्ध पारद, शुद्ध गन्धक-४०-४० ग्राम,

भस्म २० ग्राम । शुद्ध कपूर, बंग भस्म और लौह भस्म - तीनों १०-१०

ग्राम और ताम्र भस्म ५ ग्राम । विधारा की जड़, जीरा, विदारीकन्द,

शतावरी, तालमखाना, बला कीजड़, कौंच के छिलका रहित बीज, अतीस,

जावित्री, जायफल, लौंग, भांग के बीज, अजवायन और सफेद राल-सब

निर्माण विधि-भस्मों सहित पारद व गन्धक को खरल में डाल कर इतनी घुटाई करें कि सभी मिल कर एक जान हो जाएं। विधारा की द्रव्य ३-३ ग्राम। जड़ आदि सभी द्रव्यों को अलग अलग कूट पीस कर छान कर खूब महीन चूर्ण कर लें और सभी भस्मों को मिला कर खूब घुटाई करें ताकि सभी द्रव्य मिल कर एक जान हो जाएं। अन्त में जल का छींटा मार कर

थोड़ी घुटाई करें और २-२ रत्ती की गोलियां बना कर सुखा लें। बिल्कुल

सूख जाएं तब शीशी में भर लें।


मात्रा और सेवन विधि- एक गिलास दूध खूब उबाल कर गाढ़ा करें। इसे कुनकुना गर्म रहे इतना ठण्डा करके मन्मथ रस की १-१ गोली, सुबह व रात को सोने से पहले, साथ में दिव्य रसायन वटी की १-१ गोली लें और दूध पी लें। मधुमेह या बहुमूत्र के रोगी और मोटे व्यक्ति दूध फीका लें, अन्य व्यक्ति मीठा दूध लें।

उपयोग - जैसा कि इस योग के नाम से ही प्रकट होता है, यह योग, काम शक्ति बढ़ाने वाला एक उत्तम योग है। मन्मथ नाम है कामदेव का क्योंकि काम-भावना मन को मथने वाली होती है। काम- भावना मन से ही उत्पन्न और संचालित होती है इसलिए कामदेव का एक नाम 'मनोज' (मन का ओज या मन से उत्पन्न होने वाला) भी है। इस तरह मन्मथ का मतलब हआ कामदेव और रस का मतलब आयुर्वेद शास्त्र  सर्वधातूनारस इत्यभिधीयते। ज़रारुङमृत्युनाशाय रस्यते वारसो मतः ॥

(रस रत्नसमुच्चय) के अनुसार पारद यानी पारा से है अर्थात् सोना, चांदी आदि धातुओं का भक्षण करने और बुढ़ापा, रोग व मृत्यु को दूर रखने एवं इनका भक्षण करने वाला होने से पारा को रस कहा गया है। इस प्रकार

मन्मशास' का मतलब हआ काम भावना और काम शक्ति देने वालातथा बुढ़ापा, रोग और मृत्यु को दूर रखने वाला यानी दीर्घायु करने वाला योग । ऐसे अद्भुत और अति श्रेष्ठ योग का उपयोग करने से क्या क्या लाभ होते हैं इसकी सफल सिद्ध जानकारी प्रस्तुत हैइस योग का उपयोग करें और लाभ उठाएं । यह योग नियमित सेवन करने पर

चमत्कारिक लाभ देने वाला है। स्तम्भनशक्ति की कमी यानी शीघ्रपतन होने की स्थिति समाप्त करने के लिए जो आयुर्वेदिक नुस्खे कारामद और असरकारक माने जाते हैं उनमें प्रायः अफीम का प्रयोग होता ही है। हम वाजीकारक योग में अफीम के उपयोग को पसन्द नहीं करते क्योंकि अफीम का सेवन करने से इसकी लत पड़ जाती है जिसे व्यसन (Addiction) कहते हैं। हम अपने पाठकों को अफीमची यानी अफीम या किसी भी मादक द्रव्य का आदी बनाना नहीं चाहते क्योंकि हम इस नीति के मानने वाले और प्रचारक हैं कि छोटे सुख को पाने के बाद बड़ा दुःख पाना पड़े तो ऐसे सुख को त्याग देना ही बेहतर है । बड़े सुख को पाने के लिए छोटे मोटे दुःख उठा लेना बेहतर होता है । मन्मथ रस इस दृष्टि से श्रेष्ठ और निरापद योग है क्योंकि इसमें अफीम नहीं डाली जाती फिर भी यह स्तम्भन शक्ति बढ़ा कर शीघ्रपतन की स्थिति को खत्म करने में सक्षम है। अफीम या अन्य कोई मादक द्रव्य से युक्त न होने की वजह से से कोई भी विवाहित पुरुष इस योग का सेवन बेधड़क होकर कर सकता हेकीमत जाने

महिलाएं भी इस योग को सेवन कर सकती हैं क्योंकि यह योग श्वेतप्रदर रोग (Leucorrhoea) गर्भाशय (Uterus) की कमज़ोरी, बीजकोषों, (Ovaries) की शिथिलता आदि नारी रोगों को दूर कर उन्हें स्वस्थ और गर्भधारण करने योग्य बनाता है। स्नायविक दौर्बल्य दूर करने में सक्षम होने से यह योग पुरुषों के साथ ही स्त्रियों के लिए भी सेवन योग्य है

अखबारों और पत्रिकाओं में आप गुप्त रोग विशेषज्ञों के विज्ञापन अक्सर पढ़ते ही होंगे जिनके शीर्षक बड़े आर्कषक होते हैं जैसे खोई हुई जवानी प्राप्त करें'या कि 'शादी से पहले या शादी के बाद, हमसे मिलें'या कि शेर जैसी ताक़त बेमिसाल कुव्वत प्राप्त करें' आदि। ऐसे तथाकथित गुप्त रोग विशेषज्ञों के आदि गुरु थे हकीम वीरुमल जिनका नारा था - 'तोप, तीर, तलवार का निशाना खाली जा सकता है पर हकीम वीरूमल का निशाना खाली नहीं जा सकता।' इस सदी के चौथे पांचवें दशक तक हकीम वीरूमल का खूब हल्ला रहा जो देश-विभाजन के बाद अजमेरमें आ बसे थे। हम छात्र जीवन में उनके विज्ञापन अखबारों में पढ़ा करते थे और रेडियो सिलोन पर. सुना करते थे। दर असल इसका श्रेय हकीम वीरूमल को ही दिया जाना चाहिए कि उन्होंने देशवासियों को सिर्फ यह जानकारी ही नहीं दी कि गुप्त रोग होते हैं बल्कि धड़ल्ले से खुले आम इसका प्रचार भी किया और देश भर में, टूरिंग टाकीज़ की तरह भ्रमण करके, 'चलित दवाखाना' चलाने की परम्परा शुरू की। देश के बड़े नगरों की होटलों में ठहर कर उन्होंने गुप्त रोगों के रोगियों की भारी भीड़ खींची और खूब धन कमाया। हकीम वीरूमल के पहले लोग सार्वजनिक रूप से गुप्त रोगों की चर्चा नहीं करते थे क्योंकि शायद वे जानते भी न थे कि गुप्त रोग होते हैं लेकिन आज तो नक्शा ही पलट गया है। आज हर गांव और शहर में हकीम वीरूमल की परम्परा के उत्तराधिकारी और तथाकथित स्वयंभू गुप्तरोग विशेषज्ञ मौजूद हैं। आज हालात यह है कि पत्थर उठाएं तो गुप्त रोग विशेषज्ञ का इश्तहार हाथ में आता है । यहा तक कि सार्वजनिक मूत्रालय में भी जाएं तो वहां भी किसी न किसी गुप्त रोग

विशेषज्ञ का विज्ञापन पढ़ने को मिल जाएगा कि शादी के पहले या शादी के बाद, हमसे मिलें।

अब गुप्त रोग विशेषज्ञों के विषय में चर्चा करना तो इस लेख का विषय है, नहीं प्रसंगवश इतनी चर्चा करने के बाद हम लेख के पर लौटते हैं कि मन्मथ रस का सेवन करने से नपुंसकता यानी नामर्दी, शीघ्रपतन और यौनांग की शिथिलता जैसी शिकायतें दूर होती हैं और पर्याप्त यौन-शक्ति, स्तम्भन शक्ति और यौनांग की कठोरता वाली स्थिति पुनः प्राप्त हो जाती है इसलिए किसी तथाकथित गुप्त रोग विशेषज्ञ, जो कि आज कल, ज्यादा करके अनक्वालिफाइड (Unqualified) ही होते हैं, अनधिकृत (Unaurhorised) होने से छढ्मचर (Quack) ही होते हैं, के जाल में न फंस कर निरोगधाम में प्रस्तुत की गई आहार-विहार व आचार-विचार सम्बन्धी स्वास्थ्य रक्षक जानकारी पर अमल करते हुए किसी भी आयुर्वेदिक योग का नियमित रूप से सेवन कर लाभ उठाना ही

निरापद और लाभप्रद सिद्ध होगा ।

 मन्मथ रस एक ऐसा ही श्रेष्ठ और गुणकारी वाजीकारक योग है जो विलासी लोग अति सहवास करके अपनी यौनशक्ति नष्ट कर चुके हैं और स्तम्भन शक्ति बढ़ाने तथा नपुंसकता दूर करने वाले वाजीकारक नुस्खों या किसी गुप्त रोग विशेषज्ञ की तलाश में भटकते रहते हैं उन्हें इस श्रेष्ठ वाजीकारक योग 'मन्मथ रस' का सेवन इस पूरे शीतकाल में करना चाहिए। एक कहावत है - ‘हाथ कंगन को आरसी क्या और पढ़े लिखे को फ़ारसी क्या?' यानी यह घोड़ा और यह मैदान, सवारी करके खुद देख लें यानी इस योग का सेवन करके

खुद इसके लाभ देख लें। 

सहवास में अति करने या अविवाहित जीवन में हस्त मैथुन करने के आदी रहने वाले युवकों को दो शिकायतों का शिकार अवश्य ही होना पड़ता है । एक तो शीघ्रपतन होना और दूसरी यौनांग में पर्याप्त उत्तेजना और कठोरता का न होना। ऐसे भी रोगी पाये जाते हैं जिनके यौनांग की उत्तेजना एवं कठोरता, अधबीच में ही, यानी वीर्यस्खलन होने से पहले ही समाप्त हो जाती है और उनका यौनांग अचानक शिथिल हो जाता है। यह स्थिति वैसी ही होती है जैसी कि टी. वी.पर कोई बढ़ियाहै जिससे यौनांग की शिथिलता दूर होती है और वीर्यवाहिनी नाड़ियों में - उचित एवं पर्याप्त रक्त संचार होने से यौनांग में पर्याप्त समय तक कठोरता और एक बना रहती है। इस रसायन के सेवन से वीर्य पुष्ट व गाढ़ा होता है जिससे स्म्भन शक्ति बढ़ती है और शीघ्रपतन की स्थिति खत्म होती है स्नायविक दौर्बल्य या मानसिक अवसाद (डिप्रेशन) के कारण उत्पन्न हुई नपुंसकता को समाप्त कर, पौरुष बल व उत्साह प्रदान करने में यह योग गुणकारी सिद्ध होता है।

शीघ्र पतन के रोगियों को चाहिए कि वे एक गोली सुबह गोली रात को सहवास करने से घण्टा भर पहले दूध के साथ सेवन किया करें। इस प्रयोग से बिना किसी नुकसान के सहवास का पूरा सुख प्राप्त किया जा सकता है लेकिन एक बात याद रखें कि इस योग के बलबूते पर सहवास में अति न करें। सहवास के मामले में सौ सुनार की और एक लुहार की'वाली कहावत पर अमल करना चाहिए यानी रोज़ रोज़, बार-बार छोटे छोटे सहवास न करके सप्ताह में एक बारया पन्द्रह दिन में एक बार ही भरपूर और लम्बा सहवास करना चा

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इस नियम का नियमित रूप से पालन करने वाला वक्त से पहले बूढ़ा और निकम्मा

 नहीं होता। जिस दिन सहवास करना हो उस दिन, शाम का भोजन करने के ढाई घण्टे बाद, मन्मथ रस की एक गोली, कुनकुने मीठे (मधुमेह के रोगी फीका दूध लें) दूध के साथ ले लें और इसके एक घण्टे बाद मसालेदार बंगला पान (मीठा पत्ता) खा कर सहवास करें। वाजीकारक प्रभाव करने के अलावा मन्मथ रस का सेवन करने पर कुछ दूसरे लाभकारी प्रभाव होते हैं। २-३ माह तक नियमित रूप से सेवन करने वाले स्त्री-पुरुष का शरीर शक्तिशाली होता है, इन्द्रियां सक्षम और बलवान होती हैं, स्नायविक संस्थान को बल मिलता है जिससे शरीर में चुस्ती-फुर्ती बनी रहती है, बुढ़ापा दूर रहता है, जिससे लम्बे समय तक जवानी बनी रहती है, बाल पकना, उड़ना और लम्बे न होना आदि शिकायतें दूर होती हैं, चेहरा तेजस्वी होता है और शरीर में रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती है जिससे शरीर रोगों के आक्रमण का मुकाबला करने में समर्थ हो जाता है और रोग ग्रस्त होने से बचा रहता है। रोग ग्रस्त होने से बचा रहना भी बहुत बड़ी बात होती है। इस योग के सेवन से धातुएं पुष्ट होती हैं जिससे शरीर स्वस्थ, फुर्तीला और बलवान बना रहता है।


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Quantity and intake method- Boil a glass of milk and make it thick. Keep it lukewarm, cool it so much, take 1-1 tablet of Manmath juice, in the morning and before sleeping at night, along with 1-1 tablet of Divya Rasayan Vati and drink milk. Diabetic or polyuria patients and obese people should take unpasteurized milk, others should take sweet milk.


Uses - As the name of this yoga suggests, this yoga is a great yoga to increase sex power. Manmath is the name of Cupid because sex-spirit is churning to the mind. Kama-spirit originates and operates from the mind itself, hence one of the names of Kamadeva is 'Manoj' (Ooj of the mind or arising from the mind). In this way, Manmath means Cupid and Rasa means Ayurveda scripture Sarvadhatunaras Ityabhidhiyate. Zararuङmrityunasaya rasyate warso mat.


According to (Rasa Ratnasamuchaya) Parad means that mercury is from mercury, that is, because of consuming metals like gold, silver, etc. Thus


Manmashas means the yoga which gives sex feeling and sex power and keeps away old age, disease and death i.e. the yoga which gives longevity. Successfully proven information about what are the benefits of using such wonderful and excellent yoga is presented. Use and take advantage of this yoga. If you take this yoga regularly


Gives miraculous benefits. Opium is often used in Ayurvedic remedies which are considered to be effective and effective to end the condition of premature ejaculation. We do not like the use of opium in Vajikaraka yoga because consuming opium leads to its addiction, which is called addiction. We do not want to make our readers addicted to opium ie opium or any intoxicant because we are the followers and propagators of this policy that after getting small pleasures, then it is better to give up such pleasures if we have to suffer big sorrows. It is better to take small sorrows to get great happiness. Manmath Ras is the best and safest yoga from this point of view because opium is not put in it, yet it is able to eliminate the condition of premature ejaculation by increasing the power of erection. Since it is not containing opium or any other intoxicant, any married man can take this yoga without fear. know the price


Women can also take this yoga because this yoga removes female diseases like leucorrhoea, weakness of uterus, ovary, etc. Makes them healthy and conceivable. Being able to remove neurological disorders, this yoga is suitable for men as well as women.


You will often read advertisements of occultists in newspapers and magazines with catchy titles such as 'get lost youth' or 'before marriage or after marriage, visit us' or that you may attain unmatched strength like a lion. ' e.t.c. Hakim Veerumal was the first guru of such so-called occultists, whose slogan was - 'The aim of a cannon, arrow, sword can be lost, but the target of Hakim Veerumal cannot be lost.' Till the fourth and fifth decade of this century, there was a lot of ruckus of Hakim Virumal, who had settled in Ajmer after the partition of the country. We used to read his advertisements in newspapers and on Radio Ceylon during our student days. Used to hear Actually, the credit should be given to Hakim Veerumal that he not only informed the countrymen that there are secret diseases but also propagated it openly and, traveling across the country like touring talkies, 'movable dispensary' ' started the tradition of running. Staying in hotels in big cities of the country, he attracted huge crowd of patients of secret diseases and earned a lot of money. Before Hakim Virumal, people did not discuss secret diseases in public because perhaps they did not even know that there are hidden diseases, but today the map has turned. Today in every village and city there are the heirs of the tradition of Hakim Virumal and the so called self-styled gynecologist. Today the situation is such that if you pick up the stone, then the advertisement of a secret disease specialist comes in your hand. Even if you go to the public urinal, there is also some hidden disease.


You will get to read the ad of the specialist that before marriage or after marriage, meet us.


Now discussing about secret diseases is the subject of this article, not incidentally, after discussing so much, we return to the article that by consuming Manmath juice, complaints like impotence, premature ejaculation and sexual dysfunction are removed. And the condition of sufficient sexual power, erectile power and hardness of the penis is regained, so a so-called occultist, who nowadays, is more and more unqualified (Unqualified).

Manmath Rasa is one such excellent and virtuous Vajikaraka Yoga that the luxuriant people who have destroyed their sexual power by having excessive cohabitation and keep wandering in search of Vajikarak remedies or any secret disease specialist to increase erection power and remove impotence. 'Manmath Ras' should be consumed during this entire winter. There is a saying - 'What is RC to the hand bracelet and what is the Persian to the educated?' That is, this horse and this field, ride and see for yourself, that is, by consuming this yoga.


See its benefits for yourself.


Young people who are accustomed to overindulging in cohabitation or masturbating in an unmarried life must fall prey to two complaints. One is premature ejaculation and secondly there is not enough stimulation and hardness in the sex organs. There are also such patients whose sensation and stiffness of the sexual organ ends in the middle, that is, before the ejaculation, and their sexual organ becomes suddenly relaxed. This condition is the same as any good on TV, which removes the laxity of the sexual organs and due to proper and adequate blood circulation in the seminal vessels, the sexual organs remain rigid and united for a sufficient time. The use of this chemical strengthens and thickens the semen, which increases the power of ejaculation and ends the condition of premature ejaculation, by eliminating the impotence caused due to nervous debility or mental depression, this yoga is beneficial in providing virility and enthusiasm. is proved.


Patients of early ejaculation should take one tablet in the morning with milk one hour before intercourse at night. With this experiment, the complete pleasure of cohabitation can be obtained without any harm, but remember one thing that do not overdo sex on the strength of this yoga. In the case of cohabitation, the proverb of a hundred goldsmiths and one blacksmith should be followed, i.e. once a week or once in fifteen days, one should have full and long sex every day, not frequent small intercourse. Those who follow this rule regularly become old and useless


 does not happen. On the day when you want to have sex, after two and a half hours of having evening meal, take one tablet of Manmath juice, Kunkune Meethi (diabetic patients take pale milk) with milk and after one hour spicy Bangla Paan (sweet leaf) Eat and have sex. Apart from having a beneficial effect, there are some other beneficial effects of consuming Manmath juice. The body of men and women who consume it regularly for 2-3 months becomes strong, the senses are capable and strong, the nervous system gets strength, due to which the body remains agile, old age remains away, due to which long The youth remains for a long time, the complaints of hair growing, flying and not growing tall, etc. is saved from. Staying away from getting sick is also a big thing. The metals are strengthened by the consumption of this yoga, due to which the body remains healthy, agile and strong.

कामदुधा रस Kamdudha ras

 

कामदुधा रस

अब हम एक ऐसे आयुर्वेदिक योग कामदुधा रस' का परिचय प्रस्तुत कर

रहे हैं जो कई प्रकार के विकारों को दूर करने में सफल सिद्ध होता है । इसका

उपयोग स्त्री-पुरुष, युवा और वृद्ध सभी कर सकते हैं और किसी भी ऋतु में कर

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घटक द्रव्य - मुक्ता पिष्टी,प्रवाल पिष्टी, मुक्ता शुक्ति पिष्टी, वराटिका

भस्म, शंख भस्म, सोना गेरु और गिलोय सत्व - सब समान मात्रा में।

निर्माण विधि-सबको समान मात्रा में लेकर मिला लें औरखरल में

डाल कर घुटाई करके एक जान कर लें। इसे शीशी में भर कर रख लें।

मात्रा और सेवन विधि-२-२ रत्ती मात्रा में इसे,जीरा और मिश्री के

पिसे चूर्ण के साथ या अनुपान के अनुसार दिन में दो बार लेना चाहिए।

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उपयोग - इस योग का उपयोग शरीर की विभिन्न व्याधियों को दूर करने में किया जाता है इसलिए यह योग वैद्यों को अति प्रिय है। यह योगशीतवीर्य गुण वाला होने से इसका शमनकारी प्रभाव पाचन क्रिया, रक्ताभिसरण, वात वहन क्रिया और मूत्र मार्ग पर बहुत अच्छा पड़ता है और इन सब अंग-समूहों में उत्पन्न दाह दूर हो जाती है। यह योग पित्त प्रकोप अम्लपित्त (हायपरएसिडिटी), जीर्णज्वर, जलन, प्रदर, मूर्छा, चक्कर आना, अपस्मार, सिरदर्द, सोम रोग, रक्त गिरना आदि व्याधियों को दूर करने में उत्तम है। मस्तिष्क की कमजोरी, पेशाब की जलन, मुखपाक, खूनी बवासीर, गर्भवती स्त्री का वमन, नकसीर, मानसिक त्रास व बेचैनी आदि का भी शमन होता है। यह एक सौम्य रसायन है इसलिए चंचल चित्त वालों, चिन्ता तनाव से ग्रस्त रहने वालों, गर्भवती स्त्रियों और बच्चों को इसे निरापद रूप से सेवन कराया जा सकता है। सौम्य गुण वाला होने से इसके सेवन से शरीर में गर्मी बढ़ने की कोई सम्भावना नहीं रहती। सभी प्रकार के पित्त जन्य विकारों को दूर करने के लिए यह एक अव्यर्थ और प्रशस्त औषधि है। पित्त का प्रकोप होने पर रक्त में गर्मी बढ़ती है जिससे रक्त की गति बढ़ जाती है और रक्त संचार तेज़ी से होने लगता है। इसी प्रकार वात का प्रकोप होने पर शरीर में वातजन्य विविध विकार उत्पन्न हो जाते हैं। पित्त के प्रभाव से मूत्राशय पर गर्मी चढ़ जाती है जिससे पेशाब में रुकावट होना, जलन होना तथा जलन के साथ बूंद-बूंद पेशाब होना आदि तकलीफें पैदा हो जाती हैं। इस सबके लिए यह योग बेहतरीन दवा है

इसका उपयोग जनरल टॉनिक के रूप में भी किया जाता है। जीर्ण ज्वर (पुराने बुखार) के कारण शरीर में आई कमज़ोरी दूर करने के लिए यह योग गुणकारी है। शंख भस्म और वराटिका भस्म के होने से यह योग प्लीहा वृद्धि को ठीक कर उसे स्वाभाविक आकार में ले आता है। ठण्ड लग कर आने वाले बुखार मलेरिया के इलाज में कुनैन (Quinine) का प्रयोग बहुत कराया जाता है जिसके दुष्प्रभाव से कान में सीटी बजना, बहरापन होना, अनिद्रा,मन्दाग्नि, अरुचि, भूख कम होना, अपच होना आदि शिकायतें पैदा हो जाती हैं। यह योग इन सब शिकायतों को दूर करता है।

पित्त विदग्ध (हायपरएसिडिटी) होने पर रक्त भी विदग्ध होता है और इस कारण रक्तवाहिनियों की शैष्मिक कला विकृत्त होकर दीवार पतली हो जाती है और रक्तवाहिनियों के फटने से रक्तस्राव होने लगता है। इस स्थिति

में केल्शियम का अंश कम हो जाता है। रक्त पित्त की इस स्थिति के अलावा सारे शरीर में दाह होना, चक्कर आना, पेशाब में जलन, बहुत कमज़ोरी, गर्म गर्म रक्तस्राव होना और रक्तस्राव होने वाले अंग में दर्द होना आदि विकारों को  करने के लिए काम दुधारस अति उत्तम योग है। ऐसा रोगी आंखें बन्द करके पड़े रहना पसन्द करता है क्योंकि आंखें खोलने पर उसे सब कुछ घूमता नज़र आता है। पित्त और वात के प्रकोप से भयंकर सिरदर्द होता है जो वमन होने पर ही ठीक होता है। इसे माइग्रेन (Migraine) कहते हैं । यह बड़ा दुष्ट रोग है। ऐलोपैथिक दवाइयां खाते खाते रोगी परेशान हो जाता है फिर भी इस रोग से पीछा नहीं छूटता। कामदुधा रस इस रोग को दूर करने वाली उत्तम औषधि है

यदि वमन होने पर भी सिर दर्द ठीक न होता हो तो काम दुधा रस न देकर सूत शेखर रस की १-१ रत्ती मात्रा मिश्री मिले मीठे दूध के साथ दिन में दो या तीन बार लेना चाहिए। पित्तप्रधान सिरदर्द होने पर रोगी अति व्याकुल,चिड़चिड़ा, असहनशील, क्रोधी, पीड़ा के कारण सिर ठोंकने वाला, बच्चों का रोना, चिल्लाना हंसना या अन्य किसी प्रकार का शोर सहन न करने वाला और  कमज़ोर दिमाग वाला हो जाता है। ऐसे रोगी को सूतशेखर रस न देकर काम दुधा रस ही देना चाहिए क्योंकि सूत शेखर रस जहां पित्त की उत्पत्ति को नियमित और सन्तुलित करता है वहां काम दुधा रस पित्त की तीव्रता, प्रबलता, अम्लता और तीक्ष्णता को नष्ट कर पित्त प्रकोप का शमन करता है इसलिए पित्त प्रकोप के कारण होने वाले कष्ट को दूर करने के लिए कामदुधा रस ही श्रेष्ठ है।

अधिक जागने, मानसिक चिन्ता व तनाव झेलने, दिमागी परिश्रम करने, ज्यादा लिखाई पढ़ाई करने, धूप या आग की गर्मी अधिक सहन करने, पर्याप्त विश्राम न करने और आंखों पर काम का ज्यादा दबाव पड़ने से सिरदर्द होने लगता है। ऐसे सिरदर्द को दूर करने के लिए भी कामदुधा रस का उपयोग उत्तम है।

आमाशय में पित्त की वृद्धि होने से पहले अम्लता (एसिडिटी) और कालान्तर में अम्लपित्त (हायपर एसिडिटी) की स्थिति बन जाती है जिससे पेट व सीने में जलन, खट्टी व कड़वी डकार के साथ गले में चरपरा पानी आना, सिरदर्द, चक्कर, खट्टा व कड़वा पानी मुंह में आना, उलटी होना और उलटी में कड़वा व खट्टा पदार्थ निकलना आदि लक्षण प्रकट होते हैं। इस विकार में पित्त का स्राव अधिक मात्रा में होता है जिससे पित्त की तीव्रता बढ़ जाती है और भोजन खट्टा हो जाता है। इससे खट्टी उलटियां होती हैं। ऐसी स्थिति में कामदुधा रस का सेवन करने से पित्त का शमन होता है और आराम हो जाता है 

पित्त प्रकोप से होने वाले सभी व्याधियों को दूर करने के लिए कामदुधा रस अमृत के समान काम करता है। पित्त का शमन करने के लिए, अनुपान के रूप में आमलकीरसायन चूर्ण एक चम्मच जरा से शुद्ध घी में मिला कर,

इसके साथ कामदुधा रस का सेवन, दिन में तीन बार करना चाहिए। रोग की तीव्रता देखते हुए, कामदुधा रस की एक रत्ती मात्रा की जगह २-२ रत्ती लेना चाहिए। थोड़ा आराम हो जाने पर १-१ रत्ती लेना शुरू कर देना चाहिए

कामदुधा रस में पित्त शामक घटक द्रव्यों के अलावा स्तम्भक और शामक घटक द्रव्य सोनागेरु भी है अतः यह पित्त स्राव, रक्तस्राव, छोटी व बड़ी आंत के क्षोभ, जलन, प्यास, चक्कर, गुदा में जलन आदि कष्टों को रोक देता है। पित्त दोष के दुष्प्रभाव से पाचन क्रिया विकृत होती है और उदर में सेन्द्रिय विष का निर्माण होता है। इसका प्रभाव मानसिकता पर भी पड़ता है और रोगी के मन में अस्थिरता व चंचलता पैदा होती है जिससे वह ऊटपटांग हरकतें करने लगता है। यह उन्माद की स्थिति होती है। इस स्थिति में बुद्धि का विभ्रम, मन में उच्चाटन, आंखों में चंचलता व व्याकुलता, धैर्यनाश अनर्गल प्रलाप करना, चक्कर आना, शरीर सुन्न होना, बेहोशी आना आदि उपद्रव होते हैं। इन सबको दूर करने के लिए कामदुधा रस का उपयोग उत्तम हैऐसे रोगी को कामदुधा रस की २-२ रत्ती मात्रा, दो दो रत्ती ब्राह्मी चूर्ण अथवा शंखपुष्पी चूर्ण मिश्री के साथ देना चाहिए और सिर पर श्री गोपाल तैल,

महाचन्दनादि तैल या हिमसागर तैल में से किसी एक तेल की मालिश करना चाहिए।

पित्तातिसार व रक्तातिसार (खूनी पेचिश) होने पर छोटी और बड़ी आंत की अन्दरूनी त्वचा में क्षोभ (Irritation) उत्पन्न हो जाता है इससे उदर में जलन, बार-बार पानी पीने की इच्छा होना, जलन के साथ दस्त होना आदि लक्षण प्रकट होते हैं। ऐसी स्थिति में कामदुधा रस उत्तम कार्य करता है। किसी भी कारण या रोग से शरीर में केल्शियम की कमी हो जाने पर कमज़ोरी आ जाती है। रोग से मुक्त होने पर भी ऐसी स्थिति बन जाती है।

अधिक समय तक ज्वर रहने से प्लीहा और यकृत इनमें से कोई एक या कभी कभी दोनों बढ़ जाते हैं जिससे शरीर में रक्त की कमी, जीर्णज्वर, मन्दाग्नि, आलस्य, शिथिलता, कमजोरी, शरीर का पीला पड़ जाना आदि लक्षण प्रकट होते हैं। इस योग में शंख और वराटिका (कर्दिका) की भस्म है जो अपनी तेज़ी के कारण प्लीहा व यकृति की वृद्धि को रोक देती है तथा मन्दाग्नि दूर कर जठराग्नि को प्रदीप्त कर पाचन क्रिया सुधारती है जिससे रस रक्त आदि उचित प्रमाण में बनने और पुष्ट होने लगती हैं। इस तरह कामदुधा रस के सेवन से ये सभी विकार दूर होते हैं और शरीर निरोग व पुष्ट हो जाता है।

महिलाओं के लिए भी कामदुधा रस अत्यन्त उपयोगी है। रक्त प्रदर रोग में रक्त स्राव बन्द करने के लिए इस योग का उपयोग उत्तम है क्योंकि कामदुधा सभी प्रकार के रक्तस्राव को रोकने के लिए उत्तम औषधि है जैसे नकसीर फूटना,खूनी दस्त,खूनी बवासीर और रक्त प्रदर का रक्तस्राव आदि। यह एक सौम्य योग है इसलिए गर्भवती महिला को भी इसका सेवन बेखटके करा सकते हैं। गर्भावस्था में पित्तप्रकोप होने, कड़वी खट्टी व गर्म उलटी होने, पित्त प्रकोप के कारण सिरदर्द (माइग्रेन) होने पर कामदुधा रस का सेवन करना चाहिए।

बच्चों के लिए काली खांसी होने, कमजोरी होने, खट्टे व गर्म दस्त होने, खट्टी उलटी या दूध फेंकने आदि विकारों के लिए एक रत्ती की दो खुराक कर मिश्री मिले दूध में घोल कर सुबह शाम पिलाना चाहिए। इस योग में मुक्तापिष्टी, प्रवालपिष्टी और गिलोय सत्व आदि शामक घटक द्रव्य हैं इनके गुण-प्रभाव से हृदय की पीड़ा और पित्त के प्रकोप के कारण होने वाली हृदय की जलन, धड़कन व नाड़ी की तीव्रता, चक्कर आना जी घबराना आदि लक्षणों पर कामदुधा रस का सेवन करना गुणकारी सिद्ध होता है।

इतने विवरण को पढ़ कर आप यह जान-समझ चुके होंगे कि कामदुधा रस कुपित पित्त का शमन करके, कई व्याधियों को नष्ट कर शरीर को बल प्रदान करने वाला और स्फूर्ति प्रदान करने वाला एक उत्तम, निरापद और गुणकारी योग है। यदि इस योग को आप स्वयं ना बना सकें तो यह योग बाज़ार में श्रेष्ठ आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माताओं के द्वारा बना हुआ इसी नाम से मिलता है। इसे आनलाइन घर बेठे बुलवा सकते हे